कन्या राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, कन्याराशि का स्वभाव, कन्याराशि के नक्षत्र
इस राशि के जातकों का शरीर स्थूल, मध्यम कद, बड़ी आंखें, कुछ गौरवपूर्ण उन्नत, शरीर, सुन्दर, कंठ-बाहुं,पीठ- गुप्तांग में तिल आदि का निशान होता है। ये वेदमार्गी, कुटुम्बियों तथा मित्रों को आनंद देने वाले, देवता तथा ब्राह्मणभक्त, अनेक शत्रुओं से युक्त, स्त्री से दुखी, पराई सम्पत्ति से लाभ उठाने वाले, अधीनस्थ व्यक्तियों द्वारा भाग्यशाली बनने वाले, गुप्त रूप से पापाचारीत पुत्र से अधिक पुत्री वाले होते हैं। कन्या राशि के जातक नृत्य गायन-प्रिय, प्रियभाषी शर्माले प्रकृति विक वाले, मिष्टभाषी, सुशील, चतुर, विलासी, शृंगारप्रिय, दानी, कवि, शास्त्रज्ञ, बुद्धिमान, सत्यवादी, अधिकांशतः सदाचारी, धीर, सुखी अनेक विद्याओं के जानकार, अनेक सेवकों से युक्त तथा अत्यधिक कामी होते हैं। ये धर्म, विज्ञान तथा गणित में रूचि रखने वाले होते हैं।
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कन्या राशि से संबन्धित तथ्य
कन्या राशि का स्वामी ग्रह
कन्याराशि का स्वामीग्रह “बुध”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
दक्षिण दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
कन्या राशि : पृथ्वी तत्व की राशि है
स्वभाव :-
कन्याराशि का स्वभाव द्वीस्वभाव है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1॰उत्तराफाल्गुनी:- स्वामी ग्रह सूर्य स्वाभिमानी ,कृतज्ञ,दयालु,विद्वान
2॰ हस्त :- स्वामी चन्द्र दुष्ट उपकारी ,धनी ,नीतिकुशल
3 चित्रा :- स्वामी मंगल स्वाभिमानी, विधि-विधान का ज्ञाता,मन में बात गुप्त रखनें वाला
अतः कन्याराशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र का प्रभाव :-
प्रियभाषी, कार्यकुशल, अल्प द्रव्यवाला, थोड़े में जीने वाला, एकान्त प्रेमी, पशु-प्रेमी, मातृ-पितृ-सुख से वंचित, तीक्ष्ण स्मरण शक्ति का स्वामी, कला में निपुण और सम्बन्धियों से मधुर व्यवहार रखने वाला।
हस्त नक्षत्र का प्रभाव :-
मक्कार, कपटी, असत्य बोलने वाला, घमंडी, परिश्रमी, माता-पिता के कष्ट से पीड़ित, लापरवाह, गीत-प्रेमी, लम्बे डील- डौलवाला, परिश्रम से उन्नति करने वाला, जल-प्रेमी तथा पशु पालकर निर्वाह करने वाला।
चित्रा नक्षत्र का प्रभाव :-
कर्ण-नेत्र रोगी, अद्भुत कार्य करने वाला, साधारण बात पर भी गुस्सा करने वाला, नायक गुण से परिपूर्ण, शारीरिक बल बढ़ाने में प्रयत्नशील, निर्धन, विद्याभ्यास का इच्छुक, अनुभवी, शत्रुओं से मुकाबला बरने वाला तथा ईमानदार ।
कन्याराशि के फल
इस राशि के जातकों का शरीर स्थूल, मध्यम कद, बड़ी आंखें, कुछ गौरवपूर्ण उन्नत, शरीर, सुन्दर, कंठ-बाहुं,पीठ- गुप्तांग में तिल आदि का निशान होता है। ये वेदमार्गी, कुटुम्बियों तथा मित्रों को आनंद देने वाले, देवता तथा ब्राह्मणभक्त, अनेक शत्रुओं से युक्त, स्त्री से दुखी, पराई सम्पत्ति से लाभ उठाने वाले, अधीनस्थ व्यक्तियों द्वारा भाग्यशाली बनने वाले, गुप्त रूप से पापाचारीत पुत्र से अधिक पुत्री वाले होते हैं।कन्या राशि के जातक नृत्य गायन-प्रिय, प्रियभाषी शर्माले प्रकृति विक वाले, मिष्टभाषी, सुशील, चतुर, विलासी, शृंगारप्रिय, दानी, कवि, शास्त्रज्ञ, बुद्धिमान, सत्यवादी, अधिकांशतः सदाचारी, धीर, सुखी अनेक विद्याओं के जानकार, अनेक सेवकों से युक्त तथा अत्यधिक कामी होते हैं। ये धर्म, ने विज्ञान तथा गणित में रूचि रखने वाले होते हैं। इनके जीविका का साधन पृथ्वी से सम्बन्धित वस्तुओं पशु तथा शिल्पादि होता है।
उत्तराफाल्गुनी में जन्म लेने वाले परोपकारी, उत्साही व सरल स्वभाव के, हस्त नक्षत्र वाले योगी, सज्जन व स्वादिष्ट भोजन के शौकीन तथा चित्रा नक्षत्र वाले हिंसक क्रोधी, वाकपटु एवं भीतरी स्वभाव के होते हैं।
इस राशि के जातको को तीसरे वर्ष में अग्निभय, पांचवें में नेत्रपीड़ा, नवें अथवा तेरहवें में चोट लगने, पन्द्रहवें में सर्पभय, इक्कीसवें वर्ष में कि ऊंचाई से गिरने का भय एवं तीसवें वर्ष में शास्त्रार्थ से चोट लगने का भय विचा बना रहता है। इनके लिए शुभ दिन, बुध तथा शुक्रवार एवं अन्य दिन सामान्य होते हैं।
इस राशि वाले का वृष, मिथुन, सिंह, कन्या तथा तुला राशि वालों के सम साथ मित्रता, विवाह एवं व्यावसायिक सम्बन्ध बनाना लाभदायक होता है।