वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह,दिशा ( कार्य करने की ) राशि का तत्व, वृश्चिक राशि का स्वभाव, वृश्चिक राशि के नक्षत्र
इस राशि के पुरुष की स्त्रियां पतिव्रता होती हैं। इस राशि की स्त्रियां कुलटा, परपुरुष, में रुचि रखने वाली एवं व्यभिचारिणी होती है। इस राशि वाले पुरुष को दो पत्नी एवं चार भाइयों का सहयोग प्राप्त होता है। इन्हें एक पुत्र तथा एक कन्या से सुख मिलता है। विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक गणित में रुचि रखने वाले संगीत-प्रेमी, क्रोधी, हिंसक होते हुए भी विचारशील होते हैं। अनुराधा नक्षत्र वाले कपटी, जादू-टोना करने वाले तथा चौकन्ने स्वभाव के होते हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र वाले कुशाग्र बुद्धि, हिंसक, तीक्ष्ण स्वभाव वाले एवं क्रोधी होते हैं। इन्हें जीवन के पहले वर्ष में ज्वरपीड़ा, पन्द्रहवें वर्ष में सामान्य पीड़ा तथा पच्चीसवें वर्ष में अत्यधिक कष्ट होता है। इनका शुभ दिन रविवार, सोमवार, मंगलवार तथा गुरुवार एवं सामान्य दिन बुधवार, शुक्रवार और शनिवार होता है।
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वृश्चिक राशि से संबन्धित तथ्य
वृश्चिक राशि का स्वामी ग्रह
वृश्चिक राशि का स्वामीग्रह “मंगल”ग्रह होता है
दिशा (कार्य करने की)
उत्तर दिशा है
प्रत्येक राशि किसी ना किसी तत्व से सबंधित होती है
वृश्चिक राशि : जल तत्व की राशि है
स्वभाव :-
वृश्चिक राशि का स्वभाव स्थिर राशि है वह अपने से जातक को प्रभावित करती है |
नक्षत्र :-
नक्षत्रो का जातक पर प्रभाव :-
1.विशाखा :- स्वामी गुरु ,महत्वाकांक्षी ,मेहनत और दृढ़ निश्चय
2. अनुराधा :- स्वामी चंद्रमा ,दृढ़ इच्छाशक्ति ,साहसी , दृढ़ निश्चयी , गहरी समझ
3. ज्येष्ठा :- स्वामी बुध ,कवि, दानी पंडित, प्रधान, संतोषी, धर्मात्मा, कांतिमान, प्रतापी, यशस्वी, वैभवशाली, धनवान, प्रतिष्ठित, चतुर वक्ता
अतः वृश्चिक राशि मे जन्मे जातक पर तीन ग्रहो और तीनों नक्षत्रो का जातक की कुण्डली के अनुसार ,महादशा ,अंर्तदशा , प्रव्यंतरदश, योगिनीदशा का प्रभाव पड़ता है|
विशाखा नक्षत्र का प्रभाव :-
प्रियभाषी, कार्यकुशल, अल्प द्रव्यवाला, थोड़े में जीने वाला, एकान्त प्रेमी, पशु-प्रेमी, मातृ-पितृ-सुख से वंचित, तीक्ष्ण स्मरण शक्ति का स्वामी, कला में निपुण और सम्बन्धियों से मधुर व्यवहार रखने वाला।
अनुराधा नक्षत्र का प्रभाव :-
मक्कार, कपटी, असत्य बोलने वाला, घमंडी, परिश्रमी, माता-पिता के कष्ट से पीड़ित, लापरवाह, गीत-प्रेमी, लम्बे डील- डौलवाला, परिश्रम से उन्नति करने वाला, जल-प्रेमी तथा पशु पालकर निर्वाह करने वाला।
ज्येष्ठा नक्षत्र का प्रभाव :-
कवि, दानी पंडित, प्रधान, संतोषी, धर्मात्मा, कांतिमान, प्रतापी, यशस्वी, वैभवशाली, धनवान, प्रतिष्ठित, चतुर वक्ता।
वृश्चिक राशि के फल
इस राशि के जातक सुन्दर, छोटे परंतु स्थूल शरीर के, गोल तथा चमकीली आंखों वाले, चौड़े चेहरे तथा चौड़ी छातीवाले
ये परनिन्दक, भातृद्रोही, ऐश्वर्यवान्, संतोषी, स्वार्थी, कटु स्वभाव, कपटी, पापी, पाखंडी, विचारशील, दार्शनिक, दयाहीन, कार्यकुशल, रूढ़िवादी, धूर्त, निष्ठुर, क्रोधी, कपटी, कलही, विघ्नकत्र्ता, मित्रद्रोही, स्वामी विरोधी, कामासक्त, नास्तिक, लोभी, नशेबाज, बन्धुहीन, धन अर्जित करने वाले, हिम्मती, असंतोषी, क्रूर, शूरवीर, पराक्रमी, पापात्मा, विश्वासघाती पिता एवं गुरु से सुख से वंचित, व्यवसाय से लाभ तथा जलीय पदार्थों से आजीविका का उपार्जन करने वाले होते हैं।
इस राशि के पुरुष की स्त्रियां पतिव्रता होती हैं। इस राशि की स्त्रियां कुलटा, परपुरुष, में रुचि रखने वाली एवं व्यभिचारिणी होती है। इस राशि वाले पुरुष को दो पत्नी एवं चार भाइयों का सहयोग प्राप्त होता है। इन्हें एक पुत्र तथा एक कन्या से सुख मिलता है।
विशाखा नक्षत्र में जन्म लेने वाले जातक गणित में रुचि रखने वाले संगीत-प्रेमी, क्रोधी, हिंसक होते हुए भी विचारशील होते हैं। अनुराधा नक्षत्र वाले कपटी, जादू-टोना करने वाले तथा चौकन्ने स्वभाव के होते हैं। ज्येष्ठा नक्षत्र वाले कुशाग्र बुद्धि, हिंसक, तीक्ष्ण स्वभाव वाले एवं क्रोधी होते हैं। इन्हें जीवन के पहले वर्ष में ज्वरपीड़ा, पन्द्रहवें वर्ष में सामान्य पीड़ा तथा पच्चीसवें वर्ष में अत्यधिक कष्ट होता है। इनका शुभ दिन रविवार, सोमवार, मंगलवार तथा गुरुवार एवं सामान्य दिन बुधवार, शुक्रवार और शनिवार होता है।
इस राशि वालों की मैत्री, विवाह तथा व्यावसायिक सम्बन्ध मेष, कर्क, सिंह, वृश्चिक, धनु तथा मीन राशि वालों के साथ सुखकर होता है।